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प्रसन्नता आप का स्वभाव है. परन्तु हम इसे बाहर खोजते रहते हैं , जबकि यह भीतर से आती है।

प्रसन्नता आप का स्वभाव है. परन्तु हम इसे बाहर खोजते रहते हैं , जबकि यह भीतर से आती है।

प्रसन्नता आप का स्वभाव है. परन्तु हम इसे बाहर खोजते रहते हैं , जबकि यह
भीतर से आती है।

नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा फलदायी होती है

नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा फलदायी होती है

नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा फलदायी होती है और अगर श्री दुर्गा
बत्तीस नामवली का जाप क‍िया जाए तो मां से मांगी हर मुराद पूरी होती है।
मां भगवती ने अपने ही बत्तीस नामों की माला के एक अद्भुत गोपनीय रहस्यमय
किंतु चमत्कारी जप का उपदेश दिया जिसके करने से घोर से घोर विपत्ति,
राज्यभय या दारुण विपत्ति से ग्रस्त मनुष्य भी भयमुक्त एवं सुखी हो जाता
है।

दरअसल, दानव महिषासुर के वध से प्रसन्न और निर्भय हो गए त्रिदेवों सहित
देवताओं ने प्रसन्न भगवती से ऐसे किसी अमोघ उपाय की याचना की, जो सरल हो
और कठिन से कठिन विपत्ति से छुड़ाने वाला हो। तब मां ने श्री दुर्गा
बत्तीस नामवली का राज द‍िया था।

माना जाता है कि जो भी दिल से एकाग्रिचित
होकर इस नामवाली का मनन करता है, वह इस सांसारिक जीवन में आध्यात्‍मि‍क
सुख की प्राप्ति करता है। वैसे इन नामों को एक साथ
दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला कहा जाता है जो भय और विपत्ति नाशक है।
ॐ दुर्गा
दुर्गतिशमनी
दुर्गाद्विनिवारिणी
दुर्ग मच्छेदनी
दुर्गसाधिनी
दुर्गनाशिनी
दुर्गतोद्धारिणी
दुर्गनिहन्त्री
दुर्गमापहा
दुर्गमज्ञानदा
दुर्गदैत्यलोकदवानला
दुर्गमा
दुर्गमालोका
दुर्गमात्मस्वरुपिणी
दुर्गमार्गप्रदा
दुर्गम विद्या
दुर्गमाश्रिता
दुर्गमज्ञान संस्थाना
दुर्गमध्यान भासिनी
दुर्गमोहा
दुर्गमगा
दुर्गमार्थस्वरुपिणी
दुर्गमासुर संहंत्रि
दुर्गमायुध धारिणी
दुर्गमांगी
दुर्गमता
दुर्गम्या
दुर्गमेश्वरी
दुर्गभीमा
दुर्गभामा
दुर्गमो
दुर्गोद्धारिणी

मां के साथ श्री राम का पूजन कैसे जुड़ा है, जानना अपनेआप में द‍िलचस्‍प है।

मां के साथ श्री राम का पूजन कैसे जुड़ा है, जानना अपनेआप में द‍िलचस्‍प है।

मां के साथ श्री राम का पूजन कैसे जुड़ा है, जानना अपनेआप में द‍िलचस्‍प
है। दोनों ने ही असुरों का विनाश किया था तो आइए इस गहन रहस्य पर से
पर्दा उठाते हैं, दरअसल मां दुर्गा ने चंड, मुंड, शुंभ, निशुंभ,
चिक्षुपर, महिषासुर जैसा दानवों का वध किया था तो वहीं दूसरी ओर भगवान
राम ने रावण का वध किया था। भगवान राम ने भी मां दुर्गा की उपासना की थी।

वहीं श्री राम और मां दुर्गा, दोनों ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी।
पुराणों के मुताबिक भगवान राम ने भी मां दुर्गा की उपासना से शक्ति
प्राप्त की थी।
राम के जन्‍म से जुड़े हैं चैत्र नवरात्र
राम का अर्थ राम का अर्थ होता है- ‘रमन्ते योगिनो यस्मिन् स राम:’
अर्थात् योगिगण अपने ध्यान में जिन्हें देखते हैं, वे हैं राम। राम का
तंत्र में अर्थ है कल्याणकारी अग्नि और प्रकाश। दुर्गा पूजा के साथ-साथ
रामकथा जबकि मां दुर्गा शक्ति, शांति की मानक हैं इसलिए नवरात्रों में
रामचरित-मानस का विधान है और जातक दुर्गा पूजा के साथ-साथ रामकथा का भी
पाठ करते हैं।

नवरात्र‍ि के दौरान ये 5 काम नहीं करने चाहिए

नवरात्र‍ि के दौरान ये 5 काम नहीं करने चाहिए

नवरात्र‍ि के दौरान ये 5 काम नहीं करने चाहिए –
पुरुषों को नवरात्रि के दौरान दाढ़ी और बाल काटने की मनाही होती है। ये
शास्त्रों में भी वर्जित माने गए हैं। दाढ़ी बनाना और बाल कटवाना भी
उन्हीं कर्मों में शामिल है। नवरात्रि के दिनों में नाखून भी न काटें।

नवरात्र‍ि के दौरान सात्‍व‍िक खाना खाएं। नॉन-वेज से तो परहेज करें ही,
साथ ही प्‍याज, लहसुन आद‍ि के सेवन से भी दूर रहें।
नवरात्र के दिनों में आपको नशा नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे व्यक्तियों
पर देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त नहीं होती है। नवरात्र में हर उस बुरी
चीज से दूरी बनाए रखें जो आपको गलत राह पर ले जाए।
नवरात्रि के दिनों सुबह देर तक ना सोएं। सूर्योदय से पहले ही बिस्तर छोड़
दें और भोर समय में ही माता की पूजा करें।
नवरात्र के दिनों में गुरुओं और बड़ों का अपमान ना करें। महिलाओं को देवी
का स्वरूप समझा जाता है। ऐसे में नवरात्र‍ि में इनका अपमान बिल्कुल भी ना
करें।