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Category: pooja

दासहनुमान व वीरहनुमान: ये हनुमानके दो रूप हैं 

दासहनुमान व वीरहनुमान: ये हनुमानके दो रूप हैं 

दासहनुमान व वीरहनुमान: ये हनुमानके दो रूप हैं । दासहनुमान रामके आगे

हाथ जोडे खडे रहते हैं । उनकी पूंछ जमीनपर रहती है । वीरहनुमान योद्धा
मुद्रामें होते हैं । उनकी पूंछ उत्थित रहती है व दाहिना हाथ माथेकी ओर
मुडा रहता है । कभी-कभी उनके पैरों तले राक्षसकी मूर्ति भी होती है ।
भूतावेश, जादू-टोना इत्यादि द्वारा कष्ट दूर करनेके लिए वीरहनुमानकी
उपासना करते हैं ।
दक्षिणमुखी हनुमान: इस मूर्तिका मुख दक्षिणकी ओर होता है इसलिए इसे
दक्षिणमुखी हनुमान कहते हैं । जादू-टोना, मंत्र-तंत्र इत्यादि प्रयोग
प्रमुखत: ऐसी मूर्तिके सम्मुख ही किए जाते हैं । ऐसी मूर्तियां
महाराष्ट्रमें मुंबई, पुणे, औरंगाबाद इत्यादि क्षेत्रोंमें व कर्नाटकमें
बसवगुडी क्षेत्रमें पाई जाती हैं ।

अनिष्ट शक्तियोंका नियंत्रण करनेवाले हनुमान

अनिष्ट शक्तियोंका नियंत्रण करनेवाले हनुमान

हनुमान भूतोंके स्वामी माने जाते हैं । इसलिए यदि किसीको भूतबाधा हो, तो
उस व्यक्तिको हनुमानमंदिर ले जाते हैं या हनुमानस्तोत्र बोलनेके लिए कहते
हैं । जागृत कुंडलिनीके मार्गमें यदि कोई बाधा आ जाए, तो उसे दूर कर
कुंडलिनीको योग्य दिशा देना । लगभग 30%  व्यक्तियोंका विवाह भूतबाधा,
जादू-टोना इत्यादि अनिष्ट शक्तियोंके प्रभावके कारण नहीं हो पाता ।
हनुमानकी उपासना करनेसे ये कष्ट दूर हो जाते हैं व विवाह संभव हो जाता है
। (10 % व्यक्तियोंके विवाह, भावी वधू या वरके एक-दूसरेसे अवास्तविक
अपेक्षाओंके कारण नहीं हो पाते । अपेक्षाओंको कम करनेपर विवाह संभव हो
जाता है । 50 %  व्यक्तियोंका विवाह प्रारब्धके कारण नहीं हो पाता । यदि
प्रारब्ध मंद या मध्यम हो, तो कुलदेवताकी उपासनाद्वारा प्रारब्धजनक
अडचनें नष्ट हो जाती हैं व विवाह संभव हो जाता है । यदि प्रारब्ध तीव्र
हो, तो केवल किसी संतकी कृपासे ही विवाह हो सकता है । शेष 10 %
व्यक्तियोंका विवाह अन्य आध्यात्मिक कारणोंसे नहीं हो पाता । ऐसी
परिस्थितिमें कारणानुसार उपाय करने पडते हैं ।)
4. मानसशास्त्रमें निपुण व राजनीतिमें कुशल हनुमान
अनेक प्रसंगोंमें सुग्रीव इत्यादि वानर ही नहीं, बल्कि राम भी हनुमानकी
सलाह लेते थे । जब विभीषण रावणको छोडकर रामकी शरण आया, तो अन्य
सेनानियोंका मत था कि उसे अपने पक्षमें नहीं लिया जाए; परंतु हनुमानकी
बात मानकर रामने उसे अपने पक्षमें ले लिया । लंकामें प्रथम ही भेंटमें
सीताके मनमें अपने प्रति विश्वास निर्माण करना, शत्रुपक्षके पराभवके लिए
लंकादहन करना, रामके आगमनसंबंधी भरतकी भावनाएं जानने हेतु रामद्वारा
उन्हींको भेजा जाना, इन सभी प्रसंगोंसे हनुमानकी बुद्धिमत्ता व
मानसशास्त्रमें निपुणता स्पष्ट होती है । लंकादहन कर उन्होंने रावणकी
प्रजाका, रावणके सामर्थ्यपरसे विश्वास उठा दिया ।

हनुमान जयंती

हनुमान जयंती

जब भी दास्यभक्तिका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण देना हो, तो आज भी हनुमानकी
रामभक्तिका स्मरण होता है । वे अपने प्रभुपर प्राण अर्पण करनेके लिए सदैव
सिद्ध रहते । प्रभु रामकी सेवाकी तुलनामें शिवत्व व ब्रह्मत्वकी इच्छा भी
उन्हें कौडीके मोलकी लगतीं । हनुमान सेवक व सैनिकका एक सुंदर सम्मिश्रण
हैं ! हनुमान अर्थात शक्ति व भक्तिका संगम । अंजनीको भी दशरथकी रानियोंके
समान तपश्चर्याद्वारा पायस (चावलकी खीर, जो यज्ञ-प्रसादके तौरपर बांटी
जाती है) प्राप्त हुई थी व उसे खानेके उपरांत ही हनुमानका जन्म हुआ था ।
उस दिन चैत्रपूर्णिमा थी, जो `हनुमान जयंती’ के तौरपर मनाई जाती है ।
2. भक्तोंकी मन्नत पूर्ण करनेवाले
हनुमानको मन्नत पूर्ण करनेवाले देवता मानते हैं, इसलिए व्रत या मन्नत
माननेवाले अनेक स्त्री-पुरुष हनुमानकी मूर्तिकी श्रद्धापूर्वक निर्धारित
प्रदक्षिणा करते हैं । कई लोगोंको आश्चर्य होता है कि, जब किसी कन्याका
विवाह न तय हो रहा हो, तो उसे ब्रह्मचारी हनुमानकी उपासना करनेको कहा
जाता है । मानसशास्त्रके आधारपर कुछ लोगोंकी यह गलतधारणा होती है कि
सुंदर, बलवान पुरुषके साथ विवाह हो, इस कामनासे कन्याएं हनुमानकी उपासना
करती हैं । वास्तविक कारण आगे दिए अनुसार है ।

हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण क्‍यों किया जाता है?

हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण क्‍यों किया जाता है?

इसे नीचे दी सारणी से समझें –
1. हनुमान जयंती
2. भक्तोंकी मन्नत पूर्ण करनेवाले
3. अनिष्ट शक्तियोंका नियंत्रण करनेवाले हनुमान
4. मानसशास्त्रमें निपुण व राजनीतिमें कुशल हनुमान
5. जितेंद्रिय हनुमान
6. प्रचलित पूजा
7. हनुमानको तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण करनेका कारण
8. शनिकी साढेसाती व हनुमानकी पूजा

Hanuman Puja Vidhi – The ritual

Hanuman Puja Vidhi – The ritual

Take a cup of oil. Add fourteen grains of black gram (Udid) to it and
see your reflection in that oil. Then offer that oil unto Hanuman. If
one is ill and is unable to visit Hanuman’s temple, one can worship
Hanuman as per this.
Hanuman Puja Vidhi – One who responds to His devotees’ vowed observances
Even today, upon making a vowed observance, several men and women
perform daily circumambulations around Hanuman’s idol with the faith
that He is a Deity who fulfills promises. Some people wonder why
unmarried girls are advised to worship Hanuman, who is Himself a
bachelor. Some people erroneously conclude that the reason may be
psychological, that is because girls wish to marry a well-built man.
The actual reasons, however are as follows.

1. Of the unmarried, approximately 30% are unable to get married due
to the influence of distressing energies. Worship of Hanuman helps to
overcome these obstacles in marriage. (10% people are unable to get
married due to unreasonable expectation about the prospective bride or
groom. Once they make their expectations reasonable, they too are able
to get married. 50% are unable to get married due to their destiny. If
their destiny is mild or moderate, it can be overcome by worshipping
the family Deity.)
2. Among deities of the highest level, there is no such state as
‘married’ or ‘single’. There is no gender differentiation between them
either, as they are born with a resolve (Sankalpa) or by asexual
means. Man has made this differentiation between them. A female Deity
represents the male Deity’s energy.