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हनुमान चालीसा को बिस्तर पर जाने से पहले पढ़ा जा सकता है ।

हनुमान चालीसा को बिस्तर पर जाने से पहले पढ़ा जा सकता है ।

13. हनुमान चालीसा को बिस्तर पर जाने से पहले पढ़ा जा सकता है । इससे यह
सुनिश्चित होगा कि आपको बेहतर नींद मिले ।
14. जो भगवान शनि के बुरे प्रभाव में हैं, वे शनिवार को आठ बार स्नान के
बाद हनुमान चालीसा को पढ़ सकते हैं ।
15. हनुमान चालीसा पढ़ना आप दर्द से निपटने के लिए मदद कर सकते हैं कि आप
शारीरिक चोटों से मिलता है यह भी आप तेजी से उबरने के लिए मदद करता है.

जो जोड़े  शादी करने की प्लानिंग कर रहे हैं वो हनुमान चालीसा को पढ़ सकते हैं

जो जोड़े  शादी करने की प्लानिंग कर रहे हैं वो हनुमान चालीसा को पढ़ सकते हैं

11. जो जोड़े शादी करने की प्लानिंग कर रहे हैं वो हनुमान चालीसा को पढ़
सकते हैं 100 बार शादी से पहले एक दिन में पाठ यह सुनिश्चित करेगा कि वे
एक सुखी और शांतिपूर्ण शादीशुदा जीवन में प्रवेश कर रहे है ।
12. यदि आप को बच्चे के होने में समस्या है या आप यह सुनिश्चित करने
में सक्षम नहीं है कि आपके बच्चे की पढ़ाई अच्छी तरह से होगी या नहीं तो
हनुमान चालीसा पढ़ना आपकी समस्याओं का समाधान है कि आप बच्चों के सुखद
भविष्य की आशा कर सकते हैं ।

हनुमान चालीसा का अर्थ समझने की कोशिश करें जैसा कि आप इसे पढ़ते हैं

हनुमान चालीसा का अर्थ समझने की कोशिश करें जैसा कि आप इसे पढ़ते हैं

हनुमान चालीसा का अर्थ समझने की कोशिश करें जैसा कि आप इसे पढ़ते हैं
यह आपको अपनी शक्तियों की सराहना करने में और भी अधिक मदद करेगा । जब
हनुमान चालीसा एक व्यक्ति को सुनाया है जो अच्छी तरह से महसूस नहीं कर
रहा है यह उनकी मदद के लिए बेहतर और अधिक सहायक हो सकता हैं ।
7. जो लोग विश्वास नहीं करते और बातों से डर जाते हैं उन्हें हनुमान
चालीसा अवश्य पढ़ना चाहिए. इससे उन्हें ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करने
में मदद मिलेगी । हनुमान चालीसा आपके व्यक्तित्व में सुधार और जीवन में
सभी समस्याओं का सामना बेहतर करने में मदद कर सकता हैं ।

दासहनुमान व वीरहनुमान: ये हनुमानके दो रूप हैं 

दासहनुमान व वीरहनुमान: ये हनुमानके दो रूप हैं 

दासहनुमान व वीरहनुमान: ये हनुमानके दो रूप हैं । दासहनुमान रामके आगे

हाथ जोडे खडे रहते हैं । उनकी पूंछ जमीनपर रहती है । वीरहनुमान योद्धा
मुद्रामें होते हैं । उनकी पूंछ उत्थित रहती है व दाहिना हाथ माथेकी ओर
मुडा रहता है । कभी-कभी उनके पैरों तले राक्षसकी मूर्ति भी होती है ।
भूतावेश, जादू-टोना इत्यादि द्वारा कष्ट दूर करनेके लिए वीरहनुमानकी
उपासना करते हैं ।
दक्षिणमुखी हनुमान: इस मूर्तिका मुख दक्षिणकी ओर होता है इसलिए इसे
दक्षिणमुखी हनुमान कहते हैं । जादू-टोना, मंत्र-तंत्र इत्यादि प्रयोग
प्रमुखत: ऐसी मूर्तिके सम्मुख ही किए जाते हैं । ऐसी मूर्तियां
महाराष्ट्रमें मुंबई, पुणे, औरंगाबाद इत्यादि क्षेत्रोंमें व कर्नाटकमें
बसवगुडी क्षेत्रमें पाई जाती हैं ।

अनिष्ट शक्तियोंका नियंत्रण करनेवाले हनुमान

अनिष्ट शक्तियोंका नियंत्रण करनेवाले हनुमान

हनुमान भूतोंके स्वामी माने जाते हैं । इसलिए यदि किसीको भूतबाधा हो, तो
उस व्यक्तिको हनुमानमंदिर ले जाते हैं या हनुमानस्तोत्र बोलनेके लिए कहते
हैं । जागृत कुंडलिनीके मार्गमें यदि कोई बाधा आ जाए, तो उसे दूर कर
कुंडलिनीको योग्य दिशा देना । लगभग 30%  व्यक्तियोंका विवाह भूतबाधा,
जादू-टोना इत्यादि अनिष्ट शक्तियोंके प्रभावके कारण नहीं हो पाता ।
हनुमानकी उपासना करनेसे ये कष्ट दूर हो जाते हैं व विवाह संभव हो जाता है
। (10 % व्यक्तियोंके विवाह, भावी वधू या वरके एक-दूसरेसे अवास्तविक
अपेक्षाओंके कारण नहीं हो पाते । अपेक्षाओंको कम करनेपर विवाह संभव हो
जाता है । 50 %  व्यक्तियोंका विवाह प्रारब्धके कारण नहीं हो पाता । यदि
प्रारब्ध मंद या मध्यम हो, तो कुलदेवताकी उपासनाद्वारा प्रारब्धजनक
अडचनें नष्ट हो जाती हैं व विवाह संभव हो जाता है । यदि प्रारब्ध तीव्र
हो, तो केवल किसी संतकी कृपासे ही विवाह हो सकता है । शेष 10 %
व्यक्तियोंका विवाह अन्य आध्यात्मिक कारणोंसे नहीं हो पाता । ऐसी
परिस्थितिमें कारणानुसार उपाय करने पडते हैं ।)
4. मानसशास्त्रमें निपुण व राजनीतिमें कुशल हनुमान
अनेक प्रसंगोंमें सुग्रीव इत्यादि वानर ही नहीं, बल्कि राम भी हनुमानकी
सलाह लेते थे । जब विभीषण रावणको छोडकर रामकी शरण आया, तो अन्य
सेनानियोंका मत था कि उसे अपने पक्षमें नहीं लिया जाए; परंतु हनुमानकी
बात मानकर रामने उसे अपने पक्षमें ले लिया । लंकामें प्रथम ही भेंटमें
सीताके मनमें अपने प्रति विश्वास निर्माण करना, शत्रुपक्षके पराभवके लिए
लंकादहन करना, रामके आगमनसंबंधी भरतकी भावनाएं जानने हेतु रामद्वारा
उन्हींको भेजा जाना, इन सभी प्रसंगोंसे हनुमानकी बुद्धिमत्ता व
मानसशास्त्रमें निपुणता स्पष्ट होती है । लंकादहन कर उन्होंने रावणकी
प्रजाका, रावणके सामर्थ्यपरसे विश्वास उठा दिया ।

हनुमान जयंती

हनुमान जयंती

जब भी दास्यभक्तिका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण देना हो, तो आज भी हनुमानकी
रामभक्तिका स्मरण होता है । वे अपने प्रभुपर प्राण अर्पण करनेके लिए सदैव
सिद्ध रहते । प्रभु रामकी सेवाकी तुलनामें शिवत्व व ब्रह्मत्वकी इच्छा भी
उन्हें कौडीके मोलकी लगतीं । हनुमान सेवक व सैनिकका एक सुंदर सम्मिश्रण
हैं ! हनुमान अर्थात शक्ति व भक्तिका संगम । अंजनीको भी दशरथकी रानियोंके
समान तपश्चर्याद्वारा पायस (चावलकी खीर, जो यज्ञ-प्रसादके तौरपर बांटी
जाती है) प्राप्त हुई थी व उसे खानेके उपरांत ही हनुमानका जन्म हुआ था ।
उस दिन चैत्रपूर्णिमा थी, जो `हनुमान जयंती’ के तौरपर मनाई जाती है ।
2. भक्तोंकी मन्नत पूर्ण करनेवाले
हनुमानको मन्नत पूर्ण करनेवाले देवता मानते हैं, इसलिए व्रत या मन्नत
माननेवाले अनेक स्त्री-पुरुष हनुमानकी मूर्तिकी श्रद्धापूर्वक निर्धारित
प्रदक्षिणा करते हैं । कई लोगोंको आश्चर्य होता है कि, जब किसी कन्याका
विवाह न तय हो रहा हो, तो उसे ब्रह्मचारी हनुमानकी उपासना करनेको कहा
जाता है । मानसशास्त्रके आधारपर कुछ लोगोंकी यह गलतधारणा होती है कि
सुंदर, बलवान पुरुषके साथ विवाह हो, इस कामनासे कन्याएं हनुमानकी उपासना
करती हैं । वास्तविक कारण आगे दिए अनुसार है ।

हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण क्‍यों किया जाता है?

हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण क्‍यों किया जाता है?

इसे नीचे दी सारणी से समझें –
1. हनुमान जयंती
2. भक्तोंकी मन्नत पूर्ण करनेवाले
3. अनिष्ट शक्तियोंका नियंत्रण करनेवाले हनुमान
4. मानसशास्त्रमें निपुण व राजनीतिमें कुशल हनुमान
5. जितेंद्रिय हनुमान
6. प्रचलित पूजा
7. हनुमानको तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण करनेका कारण
8. शनिकी साढेसाती व हनुमानकी पूजा

Hanuman Puja Vidhi – The reason for offering oil, sindur, leaves of rui unto Hanuman

Hanuman Puja Vidhi – The reason for offering oil, sindur, leaves of rui unto Hanuman

Usually during a worship ritual, we are asked to offer something which
the Deity likes. For example, Ganapati likes red flowers, Shiva likes
bel leaves, Vishnu likes tulsi leaves, etc. Then a story is narrated
as to why the Deity likes that particular thing. In reality however,
superior deities like Shiva, Vishnu, Ganapati do not have any likes or
dislikes.
Hanuman Puja Vidhi – The reason for specific offerings to specific deities
One of the objectives of worship is that the idol to be worshipped
should get charged with divine consciousness (Chaitanya) and
facilitate our spiritual progress. In order to instill divine
consciousness, the offering made unto that idol should have greater
ability to attract pavitrakas (Subtlemost pure particles) of that
Deity which are spread as far as the maharlok (region), than any other
offering. Red flowers, bel leaves, tulsi and oil, sindur (Vermilion)
and rui leaves have maximum ability to attract pavitrakas of Ganapati,
Shiva, Vishnu and Hanuman respectively. That is why oil, sindur and
rui leaves are offered unto Hanuman.
Hanuman and Shani’s sadesati (Unfavourable period of seven and a half years)
Hanuman is worshipped to alleviate suffering due to sadesati.

Hanuman Puja vidhi (Ritual) and worship of Lord Hanuman

Hanuman Puja vidhi (Ritual) and worship of Lord Hanuman

Hanuman Puja Vidhi – Objectives
Hanuman has more manifest energy (72%) as compared to other Deities
who have approximately 10% manifest energy. The following reasons
(based on concepts of energy) inspire devotees to worship Hanuman –
1. Problems caused by negative energy, influence of Shani, etc.
2. To channelise pleasant energy : To overcome obstacles in the path
of activated kundalini (spiritual energy) and to channelise it in the
appropriate direction.
Method of worship of Hanuman and following Hanuman Puja Vidhi
Prevalent practice of worship and Hanuman Puja Vidhi
Hanuman jayanti is celebrated in Maharashtra, on the full moon day
(pournima) of the Hindu lunar month of Chaitra. Maharashtrians
consider Saturday as the day of Hanuman whereas in all other places in
India it is Tuesday and Saturday. There is a custom of offering oil
and sindur (Vermilion) to Hanuman on this day. At some places, the
practice of breaking a coconut is a part of the worship. For spiritual
progress, people worship Hanuman facing the left side, that is the
‘vamamukhi (Vama = left, mukha = face)’ idol.