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Category: Lord Hanuman

THE CURSE ON HANUMAN

THE CURSE ON HANUMAN

Lord Hanuman had earned the reputation of being notorious during his childhood. He used to pester meditating hermits, who had taken refuge in the kingdom of his father, King Kesari.


During one such incident,
an annoyed sage had hexed Hanuman. Due to the spell Hanuman was unable
to remember the powers vested in him by the deities unless someone
reminded him of it. When Sita was kidnapped by Ravana, Jambavantha had
to remind Hanuman of his powers, so that he could pursue the search
for Sita.

THE NAME HANUMAN MEANS DISFIGURED JAW

THE NAME HANUMAN MEANS DISFIGURED JAW

In Sanskrit Hanu means Jaw and man means disfigured so Hanuman means

disfigured jaw. No wonder, Hanuman’s jaw as a kid was disfigured by
none other than Lord Indra who had used his vajra (Thunderbolt)
against Anjaneya, who took sun as a riped mango and even went to trace
it up in the sky. 
It was here in the sky that Lord Indra had used his
vajra which threw Anjaneya straight on the earth damaging his jaw
forever.

HANUMAN WAS AN INCARNATION OF LORD SHIVA

HANUMAN WAS AN INCARNATION OF LORD SHIVA

Hanuman was an incarnation of Shiva and considered to be an

exemplification of strength, devotion, and perseverance.

Anjana, a beautiful Apsara in celestial palace court of Lord Brahma
was cursed by a sage that, the moment she fell in love her face would
transform to that of a monkey. Lord Brahma thought of helping her and
she took birth on Earth. Later, Anjana fell in love with Kesari, the
monkey king and they both married each other. Being an ardent devotee
of Lord Shiva, she continued with her tapasya to please the God.
Lord
Shiva was impressed and she wished him to be her son so that she would
be freed from the curse of the sage.

Few days later, King Dasrath was performing a yagna after which the
sage gave him kheer to feed all his wives. A portion of Kaushlya, his
eldest wife, was snatched by a kite who flew all the way where Anjana
was meditating. Lord Vayu (aka Pawan – Wind) on the signal of Lord
Shiva kept the kheer in Anjana’s hand. Thinking it as Lord Shiva’s
prasad Anjana ate it and thus gave birth to his incarnation – Pawan
Putra Hanuman, the son of the Lord of the Winds.

STORY OF HANUMAN’S BIRTH

STORY OF HANUMAN’S BIRTH

When Lord Vishnu decided to incarnate on earth in the form of Rama,

Lord Shiva professed his desire to serve him. Shiva’s intention
perturbs Sati as she would have to stay apart from her beloved
husband.Learning of Sati’s concern, Shiva promised to send only a
portion of him to earth so that he could fulfil both the purposes. But
the form which Shiva should adopt for his reincarnation became a cause
of great distress to both Sati and Shiva. Finally after much
deliberation, Shiva decided to assume the form of a monkey, as the
humble creature can sustain with a simple lifestyle and is free of all
bondages of caste and traditions. Thus he took birth in the form of
Hanuman, who served Lord Rama 

भगवान शिवजी के अवतार अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता श्री हनुमानजी 

भगवान शिवजी के अवतार अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता श्री हनुमानजी 

* हनुमानजी भगवान #शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान हैं ।

*  हनुमानजीका जन्म त्रेतायुगमें चैत्र पूर्णिमाकी पावन तिथिपर हुआ ।
तबसे हनुमान जयंतीका उत्सव मनाया जाता है । इस दिन हनुमानजीका तारक एवं
मारक तत्त्व अत्यधिक मात्रामें अर्थात अन्य दिनोंकी तुलनामें 1 सहस्र
गुना अधिक कार्यरत होता है । इससे वातावरणकी सात्त्विकता बढती है एवं
रज-तम कणोंका विघटन होता है । विघटनका अर्थ है, रज-तमकी मात्रा अल्प होना
। इस दिन हनुमानजीकी उपासना करनेवाले भक्तोंको हनुमानजीके तत्त्वका अधिक
लाभ होता है ।
* ज्योतिषियों की #गणना अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 #करोड़ 85 लाख 58
हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व
मेष लग्न के योग में सुबह 6:03 बजे हुआ था ।
* हनुमानजी के पिता सुमेरू पर्वत के #वानरराज राजा #केसरी तथा माता
#अंजना हैं । हनुमान जी को #पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि
पवन देवता ने हनुमानजी को पालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।
* हनुमानजी को #बजरंगबली के रूप में जाना जाता है क्योंकि हनुमानजी का
शरीर वज्र की तरह है।
* पृथ्वी पर सात मनीषियों को अमरत्व (चिरंजीवी) का वरदान प्राप्त है,
उनमें बजरंगबली भी हैं । हनुमानजी आज भी #पृथ्वी पर विचरण करते हैं।
* हनुमानजी को एक दिन अंजनी माता फल लाने के लिये आश्रम में छोड़कर चली
गई। जब शिशु हनुमानजी को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे
पकड़ने आकाश में उड़ने लगे । उनकी सहायता के लिये पवन भी बहुत तेजी से
चला। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नहीं जलने
दिया । जिस समय हनुमान जी सूर्य को पकड़ने के लिये लपके, उसी समय राहु
#सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था । हनुमानजी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब
राहु का स्पर्श किया तो वह भयभीत होकर वहाँ से भाग गया । उसने इन्द्र के
पास जाकर शिकायत की “देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन
के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे । आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य
को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है ।”
* राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल
पड़े । राहु को देखकर हनुमानजी सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे । राहु ने
इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमानजी पर वज्र से प्रहार
किया जिससे वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई ।
* हनुमान की यह दशा देखकर  #वायुदेव को क्रोध आया । उन्होंने उसी क्षण
अपनी गति रोक दी । जिससे संसार का कोई भी * प्राणी साँस न ले सका और सब
पीड़ा से तड़पने लगे । तब सारे  #सुर,  #असुर, यक्ष,  किन्नर आदि
#ब्रह्मा जी की शरण में गये । #ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये
। वे मूर्छित हनुमान जी को गोद में लिये उदास बैठे थे । जब ब्रह्माजी ने
उन्हें जीवित किया तो वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सभी प्राणियों
की पीड़ा दूर की । फिर ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान दिया कि कोई भी #शस्त्र
इनके अंग को हानि नहीं कर सकता । #इन्द्र ने भी वरदान दिया कि इनका  शरीर
#वज्र से भी कठोर होगा । सूर्यदेव ने कहा कि वे उसे अपने तेज का शतांश
प्रदान करेंगे तथा शास्त्र मर्मज्ञ होने का भी आशीर्वाद दिया। वरुण ने
कहा कि मेरे पाश और जल से यह #बालक सदा सुरक्षित रहेगा । यमदेव ने अवध्य
और  निरोग रहने का आशीर्वाद दिया । #यक्षराज कुबेर,  #विश्वकर्मा  आदि
देवों ने भी अमोघ वरदान दिये ।
* इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी (संस्कृत मे हनु) टूट गई थी ।
इसलिये उनको “हनुमान”नाम दिया गया । इसके अलावा ये अनेक नामों से
प्रसिद्ध है जैसे #बजरंग बली, #मारुति, #अंजनि सुत, #पवनपुत्र,
#संकटमोचन, #केसरीनन्दन, #महावीर, #कपीश, #बालाजी महाराज आदि । इस प्रकार
हनुमान जी के 108 नाम हैं और हर नाम का मतलब उनके जीवन के अध्यायों का
सार बताता है ।
* एक बार माता सीता ने प्रेम वश हनुमान जी को एक बहुत ही कीमती सोने का
हार भेंट में देने की सोची लेकिन हनुमान जी ने इसे लेने से मना कर दिया ।
इस बात से माता सीता गुस्सा हो गई तब हनुमानजी ने अपनी छाती चीर का
उन्हें उसे बसी उनकी प्रभु राम की छव‍ि दिखाई और कहा क‍ि उनके लिए इससे
ज्यादा कुछ अनमोल नहीं ।
* हनुमानजी के #पराक्रम अवर्णनीय है । आज के आधुनिक युग में ईसाई
मिशनरियां अपने स्कूलों में पढ़ाती है कि हनुमानजी भगवान नही थे एक बंदर
थे । बन्दर कहने वाले पहले अपनी बुद्धि का इलाज कराओ। हमुमान जी शिवजी का
अवतार हैं। भगवान श्री राम के कार्य में साथ देने (राक्षसों का नाश और
धर्म की स्थापना करने )के लिए भगवान शिवजी ने हनुमानजी का अवतार धारण
किया था ।
* मनोजवं मारुततुल्य वेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं
वानरयूथ मुख्य, श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ।
* मन और वायु के समान जिनकी गति है, जो जितेन्द्रिय है, बुद्धिमानों में
जो अग्रगण्य हैं, पवनपुत्र हैं, वानरों के नायक हैं, ऐसे श्रीराम भक्त
हनुमान की शरण में मैं हूँ ।
जिसको घर में कलह, क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटानी हो,
वह नीचे की चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे..
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन – कुमार | बल बुद्धि बिद्या देहु
मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||

सुन्दरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता हैं?

सुन्दरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता हैं?

हनुमानजी को जल्द प्रसन्न करने के लिए सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है

और इस पाठ को करने वाले व्यक्त‍ि के जीवन में खुशि‍यों का संचार होने
लगता है. क्या आप जानते हैं कि सुन्दरकाण्ड के पाठ को करने से क्या लाभ
होते हैं और क्या है इसका धार्मिक महत्व ?
1. इस काण्ड को क्यों बोला गया सुन्दरकाण्ड ? हनुमानजी, सीताजी की खोज
में लंका गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी. त्रिकुटाचल
पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध
हुआ था. दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे और तीसरे
पर्वत का नाम है सुन्दर पर्वत, जहां अशोक वाटिका थी. इसी वाटिका में
हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी. इस काण्ड की यही सबसे प्रमुख घटना थी
इसलिए इसका नाम सुन्दरकाण्ड रखा गया है.
2. शुभ अवसरों पर क्यों कराया जाता है सुन्दरकाण्ड ? शुभ अवसरों पर
गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड  का पाठ
किया जाता है. शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले सुन्दरकाण्ड का पाठ करने का
विशेष महत्व माना गया है. किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां
हो, कोई काम नहीं बन पा रहा हो या फिर आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और
समस्या हो,सुन्दरकाण्ड  के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई
ज्योतिषी या संत भी विपरीत परिस्थितियों में सुन्दरकाण्ड करने की सलाह
देते हैं.
3. सुन्दरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता हैं? माना जाता है
किसुन्दरकाण्ड  के पाठ से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं. सुन्दरकाण्ड के पाठ
में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है. जो लोग नियमित
रूप से सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं.
इसमें हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल से सीता की खोज की है. इसी वजह से
सुन्दरकाण्ड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है.
4. सुन्दरकाण्ड से मानसिक लाभ मिलता है ? वास्तव में श्रीरामचरितमानस के
सुन्दरकाण्ड की कथा सबसे अलग हैं. सम्पूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान
श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती हैं.  सुन्दरकाण्ड
एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का है.
मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने
वाला काण्ड हैं. सुन्दरकाण्ड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त
होती हैं, किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है.
5.सुन्दरकाण्ड से मिलता है धार्मिक लाभ ? सुन्दरकाण्ड से मिलता है
धार्मिक लाभ, हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी
गई है.  बजरंगबली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं, शास्त्रों में
इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं. इन्हीं उपायों में से एक उपाय
सुन्दरकाण्ड का पाठ करना है.