हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण करने का कारणपूजा के दौरान देवताओंको जो वस्तु अर्पित की जाती है,

हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण करने का कारणपूजा के दौरान देवताओंको जो वस्तु अर्पित की जाती है,

हनुमान को तेल, सिंदूर, रुईके पत्ते इत्यादि अर्पण करने का कारण

पूजा के दौरान देवताओंको जो वस्तु अर्पित की जाती है, वह वस्तु उन
देवताओंको प्रिय है, ऐसा बालबोध भाषामें बताया जाता है, उदा. गणपतिको लाल
फूल, शिवको बेल व विष्णुको तुलसी इत्यादि । उसके पश्चात् उस वस्तुके
प्रिय होनेके संदर्भमें कथा सुनाई जाती है । प्रत्यक्षमें शिव, विष्णु,
गणपति जैसे उच्च देवताओंकी कोई पसंद-नापसंद नहीं होती । देवताको विशेष
वस्तु अर्पित करनेका तात्पर्य आगे दिए अनुसार है ।
पूजाका एक उद्देश्य यह है कि, पूजी जानेवाली मूर्तिमें चैतन्य निर्माण हो
व उसका उपयोग हमारी आध्यात्मिक उन्नतिके लिए हो । यह चैतन्य निर्माण करने
हेतु देवताको जो विशेष वस्तु अर्पित की जाती है, उस वस्तुमें देवताओंके
महालोकतक फैले हुए पवित्रक (उस देवताके सूक्ष्मातिसूक्ष्म कण) आकर्षित
करनेकी क्षमता अन्य वस्तुओंकी अपेक्षा अधिक होती है । तेल, सिंदूर, रुईके
पत्तोंमें हनुमानके पवित्रक आकर्षित करनेकी क्षमता सर्वाधिक है; इसी करण
हनुमानको यह सामग्री अर्पित करते हैं ।

Article by Hanuman Yagya

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